श्री हरि अगस्त्येश्वर संस्कृत विद्यालय,ओडली
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परिचयः
उत्तराखण्ड में पौराणिक धरोहरों का एक बहुत बड़ा भंडार है जो आज विलुप्ति की कागार की ओर उग्रसर हो रहा है। ऐसा ही कुछ हमारे शिवालय के साथ भी था क्योंकि अब माईयों (जोगी-जोगिनो) के ना रहने के कारण यह बिल्कुल बंजर होता जा रहा था और एक समय ऐसा आ गया था कि यहाँ कोई पूजा करने वाला भी नहीं था। इस शिवालय को लगभग 125-130 साल पहले हमारे पूर्वजों ने बड़े ही जतन से बनाया व संवारा था। इसलिए इन धराहरों के संरक्षण व अपने पूर्वजों कि पंरम्पराओं, मान्यताओं, संस्कारों एवं अपनी संस्कृति को नियमित नीतिबद्ध आगे चलाते रहने के लिए हम इस निष्कर्ष पर पंहुचे कि क्यों ना यहाँ पर एक संस्कृत विद्यालय की शुरूआत कर दें जिससे यह देवाधिदेव महादेव का मन्दिर (शिवालय) हमेशा आबाद रहे और वैसे भी दो नदियों के सगंम पर बना यह शिवालय विद्यालय के लिए अत्यन्त ही अनुकूल और रमणीय स्थान है।
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अतः दिनांक 15 जुलाई, 2007 हमने अपने पूर्वजों के इस अंत्यन्त प्राचीन देवाधिदेव महादेव के मन्दिर में विधिवत् वेद पूजा अर्चना-मंत्रोचारण द्वारा “ श्री हरि अगस्तेश्वर संस्कृत विद्यालय,ओडली” की स्थापना की । इस विद्यालय में अभी 35 विध्यार्थी प्रवेशिका से उत्तरमध्यमा तक पड़ते हैं । यह विद्यालय गत् तीन वर्षों से पैठाणी में चल रहा था लेकिन वहाँ पर संसाधनों की कमी के कारण इसको यहां स्थान्तरित किया गया क्योंकि विद्यालय के लिए जो जरूरतें होनी चाहिये वो सभी यहां पर पूरी होती हैं। इस विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गिरिश चन्द्र नौडीयाल जी हैं तथा उनके साथ अभी दो और शिक्षकगण भी हैं जो विध्यार्थीयों को व्याकरण, साहित्य, न्याय दर्शन, ज्योतिष वेद व कर्मकाण्ड शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी देते हैं क्योंकि शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य जागरूक व आत्मनिर्भर बनाना होता है। गुरूकुल होने के कारण विध्यार्थीयों के रहने-भोजन आदि की पूरी व्यवस्था व विद्यालय का संचालन “ ओडलीगाँव महादेव मन्दिर बहुद्देशीय न्यास, दिल्ली ” द्वारा किया जाता है तथा भोजन बनाने के लिए एक व्यक्ति को भी नियुक्त किया गया है। इस विद्यालय के मुख्य सलाहकार डॉ (आचार्य) श्री गीताराम तिवाड़ी जी हैं।
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उत्तराँचल , देवताऔं की भूमि , देव-भूमि , पचंबद्री , पचंकेदार एवं पचंप्रयागों की भूमि , जिसके कण-कण में देवताऔं का वास है,ऐसी देव-भूमि में स्थापित “श्री हरि अगस्तेश्वर संस्कृत विद्यालय,ओडली” जो राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-121 (National Highway No. 121) पौड़ी - पाबौ - मुसागली - चिपलघाट - सांकरसैण - बेला - पौठाणी - थैलीसैंण मार्ग पर पौड़ी से अनुमानतः 36 की0 मी0 की दूरी पर बसा है तथा जिसका पोस्ट ऑफिस डुंगरीखाल, पट्टी बाली कन्डारस्यूं, विकास खण्ड पाबौ है। यहां पंहुचने के लिये कोटद्वार से पौड़ी-पावौ- सांकरसैण से “ बेला बाजार ” ( जो कि 3-4 गाँवों का बाजार है) पर बस से उतरना पड़ता है। बेला बाजार से 100-150 मी0 आगे एक छः फुटा जीप रोड़ है जो कि बेला से चौंरीखाल तक जाता है। इसी रास्ते बेला से “ पश्चिमी न्यार ” पर बने लोहे के पुल द्वारा महादेव के मन्दिर तक पंहुचा जाता है जो कि बेला बाजार से लगभग ½ कि0 मी0 की दूरी पर है। यह महादेव का मन्दिर (शिवालय) लगभग 125-130 साल पुराना है और इसमें इतनें ही पुरानें बड़, पीपल, आम, अखरोट इत्यादि के पेड़ हैं जो मन को पवित्रता, सुख और शांति प्रदान करने के साथ-साथ अपनी औषधीय विशेषता के कारण जीवनदाता का भी काम करते हैं।
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अभी यहाँ 6 कमरों की व्यवस्था है, जिसमें से 2 कमरे विध्यार्थीयों के आवास के लिए, 1 कमरा शिक्षकों का आवास, 1 कमरा कार्यालय, 1 कमरा धूनीघर एंव 1 कमरा भोजन-व्यवस्था व राशन-भंडारण इत्यादि के लिए तथा एक काफी खुला स्थान जिसके उपर छत है और जिसमें हवन-कुण्ड बना है, विध्यार्थीयों के पड़ने व वेद-पाठ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अभी इसमें और कमरों के निर्माण के लिए फण्डस का इन्तजाम किया जा रहा है। जिससे भविष्य मैं विद्यालय की जरुरतों के अलावा यात्रीयों के ठहरने का भी इंतजाम हो सके और यह स्थान धार्मीक व पर्यटन स्थल के रूप जाना जा सके।
दिनांक 13.8.2007 को सावन महिने के आखरी सोमवार को “ श्री हरि अगस्तेश्वर संस्कृत विद्यालय,ओडली” के शिक्षकगणों व विध्यार्थीयों ने संस्थापकों, तथा समस्त निवासी ग्राम ओडली, खंडुली, डूंगरी, जितोली इत्यादि के सहयोग से एक समाहरोह का आयोजन किया जिसमें ओडली महादेव मन्दिर से पैठाणी महादेव मन्दिर तक 51 कलसों की यात्रा व झांकियां निकाली गई जिनमें लगभग 2000 लोग सामिल हुए और उसके बाद भंडारे का भी आयोजन किया गया। जिसके कुछ फोटो यंहा पर दिखाए गए हैं।
पिछले सत्र तक इसकी परीक्षाओं का संचालन श्री हरि आर्दश संस्कृत विद्यालय, क्यूकालेश्वर, पौड़ी द्वारा किया जा रहा था परंतु अब इस विद्यालय कि मान्यता के लिए भी जरूरी कार्यवाही शुरू कर दि गयी है।
इस विद्यालय का सभी खर्चा अभी “ ओडलीगाँव महादेव मन्दिर बहुद्देशीय न्यास, दिल्ली ” के द्वारा उठाया जा रहा है तथा इसके अतिरिक्त निम्नलिखित व्यक्ति भी हमारे इस कार्य में विध्यार्थीयों के भोजन-व्यवस्था के लिए अपना महान योगदान दे रहे हैं । हम इस महान योगदान के लिए उनका हार्दिक धन्यवाद करते हैं।
श्री मिथलेस कुमार जी,कालकाजी एक्सटैन्शन, दिल्ली हर माह एक आटे की बोरी दे रहे हैं।
Ph. No. 09811881911 & 09213777115
श्री लव कुमार गुप्ताजी, P -61 , साउथ एक्सटैन्शन पार्ट-2, नई दिल्ली चावल की बोरी दे रहे हैं।
Ph. No. 09811 010184 & 9811424842
अगर आप को इस विद्यालय के बारे में कोई भी जानकारी चाहिए या आपके कोई सुझाव हों या आप इस विद्यालय में पड़ने वाले विध्यार्थीयों की कोई साहयता करना चाहते हों, तो हमारी आपसे प्रार्थना है कि हमें अपने सुझाव व विचार info@odaligaon.com पर जरूर भेजें।
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